पंजाब वक्फ बोर्ड: इतिहास में सब कुछ होने के बावजूद जमीन पर काम नदारद, कलीम आजाद ने प्रशासनिक अधिकारी पर उठाए गंभीर सवाल

जालंधर/चंडीगढ़: पंजाब वक्फ बोर्ड के पूर्व सदस्य मोहम्मद कलीम आजाद ने बोर्ड की मौजूदा कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पंजाब वक्फ बोर्ड के इतिहास में सब कुछ होने के बावजूद, आज जमीनी स्तर पर कोई काम नजर नहीं आ रहा है। आजाद ने बोर्ड के गिरते स्तर के लिए सीधे तौर पर सरकारी तंत्र और प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी को जिम्मेदार ठहराया है।
प्रशासनिक अधिकारी की मनमानी से बोर्ड मूकदर्शक
मोहम्मद कलीम आजाद ने आरोप लगाया कि बोर्ड के इतिहास के पन्नों में पिछले समय में किए गए शानदार काम दर्ज हैं, लेकिन उन्हें लागू करने वाला मौजूदा सरकारी तंत्र पूरी तरह फेल साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि एक विशेष प्रशासनिक अधिकारी ने पूरी व्यवस्था को अपने नियंत्रण में ले रखा है। हालात यह हैं कि बोर्ड के अंदर इतनी दखलअंदाजी है कि बोर्ड के सदस्य सिर्फ मूकदर्शक बनकर रह गए हैं। जो भी एजेंडा मीटिंग में आता है, वह सिर्फ अधिकारी की मर्जी का होता है। बोर्ड के सदस्यों के सुझावों या किसी अन्य प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया जाता है और सदस्यों को अपनी बातों में उलझाकर फैसलों को मैनिपुलेट (हेरफेर) कर दिया जाता है।
जनहित का फैसला अधर में: मृत्यु प्रमाण पत्र की योजना ठप
कलीम आजाद ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करते हुए बताया कि पिछले बोर्ड ने जनहित में एक ऐतिहासिक फैसला लिया था। इसके तहत पूरे पंजाब के सभी सर्कल ऑफिसों के जरिए हर मस्जिद को एक-एक रजिस्टर मुहैया कराया जाना था। इसका उद्देश्य यह था कि किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका विवरण (नाम, पता, आधार कार्ड) उस रजिस्टर में दर्ज हो। यह जानकारी वक्फ बोर्ड के सर्कल ऑफिस जाती और वहां से मृतक के परिवार को एक पत्र जारी होता, जिसके आधार पर नगर निगम आसानी से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर सकता था। इससे मुसलमानों को कॉरपोरेशन में एंट्री और प्रमाण पत्र हासिल करने में बड़ी राहत मिलती।
लेकिन, अफसोस की बात है कि प्रशासनिक अधिकारी ने आज तक इस फैसले को लागू (Implement) नहीं होने दिया। यह सीधा संकेत है कि जनहित के कार्यों को जानबूझकर रोका जा रहा है।
साजिश के तहत अधिकारों का हनन
आजाद ने कड़े शब्दों में कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश के तहत किया जा रहा है ताकि जमीनी स्तर पर बोर्ड का कोई कामकाज दिखाई न दे। उन्होंने सवाल उठाया कि पूरे पंजाब में एक ही प्रशासनिक अधिकारी का बोर्ड के सिस्टम पर इतना कब्जा क्यों है? चाहे सरकार नई बने या बोर्ड नया गठित हो, इस अधिकारी का मकसद सिर्फ सदस्यों को उनके अधिकारों से वंचित रखना होता है।
आगे और भी बड़े खुलासे
पूर्व सदस्य मोहम्मद कलीम आजाद ने कहा कि बोर्ड में हालात बद से बदतर हो चुके हैं और कोई भी अधिकारी से सवाल पूछने की हिम्मत नहीं कर पा रहा है। उन्होंने ‘जागते रहो पंजाब, बसते रहो’ का नारा देते हुए कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने घोषणा की है कि 26 जनवरी से पहले वे वक्फ बोर्ड से जुड़े और भी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे और दूसरी बड़ी पोल खोलेंगे।

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