


जालंधर, 9 सितंबर (विष्णु): पंजाब सरकार एक तरफ नगर निगमों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं जालंधर में सामने आ रहा एक निर्माण मामला इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। सैदा गेट गुरुद्वारा के पास तीन बड़े-बड़े शोरूम लगभग तैयार हो गए, लेकिन नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच कथित तौर पर तमाशबीन बनी रही।
जानकारी के मुताबिक, एक कपड़ा कारोबारी द्वारा यहां तीन बड़े शोरूमों का निर्माण करवाया गया है। सवाल यह है कि इतने बड़े निर्माण के दौरान नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक नहीं लगी या फिर जानबूझकर कार्रवाई से परहेज किया गया?
सूत्रों का दावा है कि निगम के एक अधिकारी की कथित मिलीभगत के चलते निर्माण कार्य बिना किसी प्रभावी रोक-टोक के आगे बढ़ता रहा। यही नहीं, इलाके में अब यह चर्चा भी है कि कथित ‘सेटिंग’ के चलते बिल्डिंग ब्रांच ने आंखें मूंदे रखीं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल
यदि निर्माण नियमों के विपरीत था तो इसे शुरुआती स्तर पर ही क्यों नहीं रोका गया? और यदि निर्माण वैध है तो नगर निगम प्रशासन इसकी मंजूरी और नक्शे की स्थिति सार्वजनिक करने से क्यों नहीं पहल करता?
शहर में आम आदमी द्वारा मामूली निर्माण करने पर नोटिस और कार्रवाई की खबरें सामने आती रहती हैं, लेकिन तीन बड़े शोरूम लगभग तैयार होने तक निगम की कार्रवाई न होना अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा है।
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर हैं कि वह इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर निर्माण की वैधता, स्वीकृत नक्शे और संबंधित अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट करेगा या फिर यह मामला भी शहर में चल रहे कथित अवैध निर्माणों की फाइलों में दबकर रह जाएगा।
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