गरीबों के मसीहा वेद प्रकाश कोहली की रस्म किरया आज

जालंधर 3 अक्टूबर (विष्णु): बचपन से सुनते आए हैं कि अच्छे इंसान को भगवान बहुत जल्द अपने पास बुला लेता है। आज ऐसा ही एक शख्स जो हर कदम पर गरीबों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चला था और जब भी वह अपने घर से निकलता था तो किसी भी गरीब या जरूरतमंद को देखता था तो उसकी मदद करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाता था। हजारों घरों को रोजगार देने वाला वेद प्रकाश कोहली ,  इस दुनिया को अलविदा कहकर भगवान के चरणों पर जा विराजा है। उनकी जिंदगी बचपन से ही बड़ी संघर्ष भरी थी। उनका  जन्म 25 दिसंबर 1944 को हुआ।  जब वेद 18 साल के थे तब उनके पिता इनको छोडक़र भगवान के चरणों में चले गए थे और वेद प्रकाश ने अपनी संघर्ष भरी जिंदगी परिवार के साथ पक्का बाग से शुरू की। छह बहनों की जिम्मेवारी भी संभाली और उन्हें पिता की कमी महसूस नहीं होने दी। साल 2000 पक्का बाग में रहे फिर गुरु तेग बहादुर नगर आ गए। पूरे जीवनकाल के दौरान सभी से प्यार से मिले और हर काम निर्भीकता से किया।
संघर्ष करते-करते जब उनके दोनों बेटे उनके कंधों तक पहुंचे तो इन्होंने शराब के व्यापार में अपना व्यवसाय शुरू किया और दिन बदलते गए इन की गरीबी दूर हुई। वेद प्रकाश कोहली ने सदैव कोशिश रही कि कोई गरीब भूखा नहीं सोए और गरीबों को काम दे कर गरीबी रेखा से ऊपर लेकर जाएंगे। हजारों घरों को खाना देने वाला आज खुद भगवान के चरणों पर जा विराजा  है इसके पीछे इसका परिवार एक बेटा जो विदेश में है और एक बेटा यहां पर इनके शुरू किए व्यवसाय को आगे बढ़ा रहा रहा है। पंकज कोहली  उर्फ मट्टू जो इस समय उनके कारोबार को चला रहा है और उसके साथ इन से जुड़े  गरीब लोगों को भी आगे बढ़ा रहा हैं। जो विदेश में अश्वनी  कोहली उर्फ रिंकू वहां पर अपने चाचा के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहा हैं। वेद प्रकाश कोहली जो इस दुनिया को एक अक्टूबर को अलविदा कह गए अपने पीछे बहुत से ऐसे अधूरे काम  छोड़ गए  जो इनका बेटा पंकज कोहली पूरे करेगा। पंकज ने कहा कि पिताजी के जो सपने थे वह सारे साकार होंगे।

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