पंजाबी पाठ्य पुस्तकों पर विवाद: आपत्तिजनक सामग्री को लेकर कार्रवाई की मांग

जालंधर, 1 अप्रैल । पंजाब प्रेस क्लब में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाबी पाठ्य पुस्तकों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि इन पुस्तकों में एस.सी./एस.टी. समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिससे समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं।
वक्ताओं ने बताया कि अमरदीप प्रकाशन/पेसमेकर पब्लिकेशन, जालंधर-दिल्ली द्वारा प्रकाशित ये पुस्तकें प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक के लिए निर्धारित हैं और कई स्कूलों, जिनमें डी.ए.वी. से जुड़े संस्थान भी शामिल हैं, में पढ़ाई जा रही हैं। भूपिंदर कौर और डॉ. अमरजीत कौर द्वारा लिखित ‘नवि नुहार’, ‘नवि नुहार डी.ए.वी.’, ‘निकुंज’ और ‘निर्मोलक’ जैसी पुस्तकों में कथित रूप से समाज के विशेष वर्गों के प्रति अपमानजनक सामग्री शामिल है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी आरोप लगाया गया कि एक ही सामग्री को अलग-अलग नामों से प्रकाशित किया गया है और कई पुस्तकों में प्रकाशक की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है, जो पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। वक्ताओं ने कहा कि यह शिक्षा प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने CBSE के 12 अगस्त 2024 के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी पाठ्य पुस्तक में ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी भी वर्ग या समुदाय की भावनाएं आहत हों। इसके बावजूद इन पुस्तकों का उपयोग जारी रहना नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।
मामले को लेकर अमरदीप प्रकाशन/पेसमेकर पब्लिकेशन, उनके मालिकों, लेखकों तथा डी.ए.वी. कॉलेज मैनेजिंग कमेटी, नई दिल्ली सहित अन्य संस्थाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर प्रकाशन पर प्रतिबंध लगाने, पुस्तकों को वापस मंगवाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
इस मौके पर प्रेम पाल डुमेली, अतुल चड्डा, महेश दत्त, कश्मीरी लाल, प्रदीप, अशोक व अन्य उपस्थित रहे..

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