“नाला पाटा, सरकारी जमीन पर कब्जा और अब कोठियां तैयार! अर्बन एस्टेट-1 में ‘भू-माफिया’ के खेल पर हंगामा”

जालंधर (विष्णु): अर्बन एस्टेट फेज-1 की पिछली तरफ गंदे नाले से सटी सरकारी जमीन पर कथित कब्जे और निर्माण का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले गंदे नाले को मिट्टी डालकर पाटा गया और इसके बाद जमीन पर कब्जे का खेल शुरू हो गया। अब इसी जमीन पर दो बड़ी रिहायशी कोठियों का निर्माण किए जाने की बात सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, सरकारी जमीन की हदबंदी और रिकॉर्ड स्पष्ट किए बिना जिस तरह निर्माण कार्य आगे बढ़ रहा है, उसने संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का आरोप है कि यदि जमीन वास्तव में सरकारी है तो उस पर निर्माण कैसे शुरू हो गया और विभागों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?
नाला पाटा, जमीन पर कब्जे के बाद निर्माण शुरू होने का आरोप
बताया जा रहा है कि अर्बन एस्टेट फेज-1 की पिछली तरफ से गुजरने वाले गंदे नाले को मिट्टी डालकर बंद किया गया था। इसके बाद कथित तौर पर जमीन पर कब्जे किए जाने लगे। अब मौके पर निर्माण कार्य जारी होने से मामला और गंभीर हो गया है।
इलाका निवासियों ने मांग की है कि संबंधित विभाग मौके की पैमाइश करवाकर सरकारी जमीन की निशानदेही करें और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करें। यदि जांच में कब्जा या अवैध निर्माण सामने आता है तो उसे तुरंत हटाने की कार्रवाई की जाए।
नहरी और वाटर रिसोर्सिज विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने नहरी विभाग और वाटर रिसोर्सिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन की निगरानी और उसकी हदबंदी सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है। ऐसे में कथित कब्जे के बाद निर्माण शुरू होने तक कार्रवाई न होना जांच का विषय है।
डिप्टी मेयर बोले—सरकारी जमीन पर कब्जा मिला तो होगी कड़ी कार्रवाई
जालंधर के डिप्टी मेयर मलकीत सिंह सुबाना ने कहा कि सरकारी जमीन पर कथित कब्जे के मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच के दौरान जमीन पर कब्जा या निर्माण गैर-कानूनी पाया गया तो नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि नाजायज तौर पर बन रही इमारतों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब सवाल यह है कि संबंधित विभाग कब मौके पर पहुंचकर जमीन की निशानदेही करवाते हैं और रिकॉर्ड की जांच करते हैं। यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण की पुष्टि होती है, तो कथित कब्जाधारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है—इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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