


जालंधर, 3 अक्टूबर (विष्णु): जालंधर वेस्ट के बस्ती दानिशमंदा इलाके में नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि कथित अवैध निर्माण को लेकर नगर निगम की ओर से तीन-तीन बार नोटिस लगाए जाने के बावजूद निर्माण कार्य नहीं रुका और देखते ही देखते दो दुकानें बनकर तैयार हो गईं। अब दुकानों में शटर तक लगाए जाने की बात सामने आ रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम को निर्माण संबंधी शिकायत मिलने के बाद मौके पर कथित तौर पर तीन बार नोटिस लगाए गए। आरोप है कि हर बार कुछ दिनों के भीतर नोटिस उतारकर फेंक दिए गए और निर्माण कार्य लगातार जारी रहा। इसके बावजूद बिल्डिंग ब्रांच की ओर से निर्माण को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि एक व्यक्ति, जो कथित तौर पर खुद को नगर निगम कमिश्नर का करीबी बताता है, और संबंधित बिल्डर की मिलीभगत से निर्माण कार्य करवाए जाने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नगर निगम की ओर से तीन बार नोटिस जारी किए गए थे तो उसके बाद भी निर्माण कार्य कैसे चलता रहा और महज कुछ दिनों में दुकानें तैयार होने तक पहुंच गईं? क्या नोटिस केवल कागजों तक सीमित रह गए या फिर उन्हें हटाए जाने के बाद निगम अधिकारियों ने मौके की दोबारा जांच नहीं की?
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